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bipin.chaudhary.pep.zone

मैंने उसकी सलवार पहनी

पढ़े कैसे मेरे मित्र ने शारीरिक कठिनाई पर विजय प्राप्त करके वासना के समंदर में डुबकी लगाई

यह कथा मेरे अच्छे मित्र गंजीव पिछहरी की है जिसको हम प्यार से गंज भी बोलते हैं। गंज नाम से पीछे दो कारण हैं
1- उसको लखनऊ की गंज मार्किट में घूमना बड़ा पसंद है
2- उसका आंशिक गंजापन जो शायद बचपन की गलतियों के कारन आया

पर गंज बहुत ही खुशमिजाज़ और जीवंत लड़का है जो खाने का बहुत ही शौक़ीन है। पूड़ी कचौड़ी तला भुना देख के उसकी लार टपकने लगती है।
वह शाकाहारी है , पहले मांसाहार करता था पर एक बार बवासीर की शिकायक के पश्चात उसके हकीम ने गोश्त खाने की मनाही करदी।
तबसे बेचारा पनीर पर ही जान छिड़कता है।

इतना खाने की वजह से उसका पेट ऐसा निकला हुआ है जैसे कपड़े में पनीर निचोड़ने के लिए लटकाया जाता हई और फूला रहता है। पर उसने कभी इसकी परवाह की ही कहाँ।

कॉलेज में उन दिनों महोत्सव और स्वप्निल के साथ उसकी दोस्ती चरम पर थी
। एक शिमेल जैसा सीनियर वैगन आर गाड़ी लेकर कॉलेज जाता था और ये तीनो ही उसमे लटक लेते थे।
पर वह गाड़ी लौन्दियाबाज़ी के मकसद से ही ले जाता था। एक इंटर्न थी जो की गौरैया जिले की रहने वाली थी उसको कार में आगे बिठा के ये लोग उसके रूम तक छोड़ते थे। वह थोड़ा उन्मुक्त एवं चंचल स्वाभाव की थी ,हम लोग तो उसको छिनरी ही बोलते थे। वह अपनी छोटी बहन के संग मंदिरापुरम में रहती थी।
गाड़ी में ये तीनो चंदा लगाकर पेट्रोल भरवाते थे और उसको मुफ्त में ले जाते थे। वो कहते हैं न इश्क क्या क्या न करवा ले।
गंज उसका बहुतदीवाना हो चूका था। महोत्सव हलाकि चालाक था और छोटी बहन पर लाइन मरता था। सीनियर और स्वप्निल भी दीवाने थे। वो इनको अपनी बातो में बहलाती और पैसे खर्च करवाती।

ऐसा सुनने में आया था की गंज रोज़ उसके लिए एक रोस्टेड मुर्गा और पिज़्ज़ा लेके जाता था और करीबन 10000 प्रति माह उसपर व्यय कर रहा था। यह पैसे वह घर से झूठ बोलके ही मंगवाता था।
उस लड़की को विन्नी द पूह कार्टून से बड़ा लगाव था और इसलिए गंज ने अपने कमरे में भी तमाम स्टीकर चस्पा कर रखे थे । गंज खुद भी उसी डील डौल वाला ही तो था।
तो इसलिए उसको यह भ्रम हुआ की वह लडकी उस से प्रेम करती है । इस वजह से उसका स्वप्निल से 36 का आंकड़ा रहता था उन दिनों जो अबतक कायम है।
महोत्सव तो बस कैटेलिस्ट का काम करताऔर मज़ा लेता इन दोनों के आपसी द्वन्द का और खुद पिछले द्वार से छोटी बहन पर हाथ साफ़ करने की फिराक ...
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